सम्राट अशोक की जीवनी, उपाधि और शासन

आज की किस पोस्ट में हम पढ़ने वाले हैं सम्राट अशोक के बारे में तो अगर आप सम्राट अशोक के बारे में पूरी जानकारी चाहते हैं तो आज की इस पोस्ट को पूरा अंत तक जरूर पढ़ें.

सम्राट अशोक की जीवनी, उपाधि और शासन

सम्राट अशोक का परिचय

सम्राट अशोक का जन्म 304 ईसा पूर्व 13 अप्रैल को पाटलिपुत्र मैं हुआ था सम्राट अशोक मौर्य वंश के एक बहुत ही शक्तिशाली एवं सुप्रसिद्ध राजा थे.

सम्राट अशोक का पूरा नाम देवानांप्रिय अशोक मौर्य था.

सम्राट अशोक का राज अभिषेक 270 ईसा पूर्व किया गया था, और इन्होंने 269 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक अखंड भारत पर शासन किया.

सम्राट अशोक के समय मौर्य वंश का साम्राज्य उत्तर में हिंदू कुश के श्रेणी से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी तक तथा पूर्व में बांग्लादेश से लेकर पश्चिम में अफगानिस्तान ईरान फैला हुआ था.

सम्राट अशोक बिंदुसार तथा सुभद्रांगी के पुत्र थे। इसका वर्णन दिव्यवदानं ग्रंथ में मिलता है.

अशोक की पत्नी का नाम देवी था जो कि विदिशा के श्रेस्ठी के पुत्री थी.

इसकी जानकारी सिंगली परंपरा में मिलता है जहां यह बताया गया है कि देवी सम्राट अशोक की सबसे पहली पत्नी थी. अशोक और देवी के 2 पुत्र थे महेंद्र और संघमित्रा.

लेकिन इसके अलावा अशोक के चार और पुत्र थे चारुमित्रा, कुणाल, जालॉक और टीवर.

लेकिन अधिकांश जगह पर सम्राट अशोक के मात्र दो ही पुत्रों के बारे में उल्लेख मिलता है महेंद्र और संघमित्रा के बारे में.

दिव्या दांत ग्रंथ में सम्राट अशोक के एक और पत्नी के बारे में बताया गया है जिनका नाम तिष्रश्रिता बताया गया है.

साथ ही कई जगह पर इनके चार पत्नियों के बारे में जिक्र मिलता है जिनका नाम देवी कारुवाकी पद्मावती और तिष्यरक्षिता बताया गया है.

सम्राट अशोक के प्रमुख उपाधि

अशोक के उपाधि से रिलेटेड बहुत सारे प्रश्न पूछे जाते हैं चलिए इस चीज के बारे में भी अच्छे से जानते हैं.

इसके उपाधि के बारे में कई ग्रंथों और पुराणों में इसका जिक्र मिलता है इसके अभिलेखों से भी इसके उपाधियों के बारे में जानकारी मिलती है.

पहले हम इसके अभिलेखों में दिए गए उपाधि के बारे में जानेंगे.

सम्राट अशोक के प्रमुख उपाधि

देवानांप्रिय – सम्राट अशोक के अभिलेखों में सबसे ज्यादा इसी नाम के बारे में जिक्र हुआ है.

भाप्रु जो कि राजस्थान में स्थित है इस अभिलेख के अनुसार सम्राट अशोक के दो नाम दिए गए हैं प्रियदर्शी और प्रियदासी.

मास्की गुर्जरा अभिलेख में अशोक को बुद्ध शाक्य की उपाधि का वर्णन मिलता है।

अशोक के महान सम्राट बनने की कहानी

अशोक शब्द का अर्थ होता है शोकरहित जो हर तरह के शौक से मुक्त हो जिसके पास शोक की जगह ना हो साथ ही अशोक को देवनाप्रिये भी कहा जाता था जिसका अर्थ होता है.

भगवान का प्रिये इसके अलावा उन्हें प्रियदर्शी के तौर पर भी जाना जाता है. इसका मतलब होता है हर एक को बराबरी से पसंद करने वाला.

अशोक को भारत के इतिहास के साथ-साथ दुनिया भर में 2 वजहों से जाना जाता है.

पहला वजह कलिंग का युद्ध और दूसरा भारत और दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए.

शुरुआती दिनों में अशोक बहुत ही क्रूर थे और यह भी माना जाता है जाता है कि सिंहासन हासिल करने के लिए उन्होंने अपने सौतेले भाइयों की हत्या भी की थी.

यही कारण है कि इन्हें चंड अशोक के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ होता है क्रूर अशोक.

साथ ही यह भी बताया जाता है इन्होंने अपने पड़ोसी राज्यों में अतिक्रमण करने का कोई मौका नहीं गंवाया लेकिन कलिंग युद्ध और उसने मिली जीत को सम्राट अशोक की आखिरी जीत माना जाता है.

क्योंकि इसके बाद अशोक पूर्ण रूप से बदल गए थे कलिंग युद्ध के बारे में यह माना जाता है कि दोनों पक्षों में 100000 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे, कई लोग बेघर हो गए थे, कई लोगों की जान भी गई थी इस बर्बादी का दृश्य देखने के बाद अशोक ने चिल्लाकर कहा था यह मैंने क्या कर दिया.

इससे ही उनकी नीति में बदलाव आया, उन्होंने अपने राज्य की बेहतरी के लिए बहुत सारे अच्छे प्रयास किए और इसके लिए उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया.

उन्होंने बौद्ध धर्म को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी फैलाया इसके लिए उन्होंने बुद्ध के जीवन से जुड़ी जगहों पर कई स्तुपों का निर्माण भी किया.

इसकी बदौलत उन्हें धर्म अशोक की उपाधि भी मिली जिसका मतलब होता है पावन या पवित्र अशोक.

उन्होंने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को सिलोन भेजा ताकि वहां बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार हो सके.

अशोक ने बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए हजारों स्तूप और बिहार बनवाए, अशोक ने सारनाथ में अशोक स्तम्भ बनवाया जो बहुत ही लोकप्रिय स्तूप है.

आज भी सारनाथ का अशोक स्तम्भ एक प्राचीनतम और सुंदर इतिहास का गवाह बनता है, और यह भारत का राष्ट्रीय चिन्ह भी है.

अशोक ने करीब 32 साल तक शासन किया और उनका निधन 232 ईसा पूर्व में हुआ उन्हें भारत में आज भी बौद्ध धर्म की सेवा के लिए जाना जाता है.

कुछ जानकार और इतिहासकार अशोक के बारे में लिखा था कि दुनिया के इतिहास में कई राजा महाराजा और सम्राट हुए उन्होंने खुद को जनता का शासन उनका अधिनायक तक कहते रहे और फिर गायब हो गए.

लेकिन अशोक की चमक आज भी फीकी नहीं पड़ी, आज भी अशोक एक सितारे की तरह चमकदार बने हुए हैं और आज भी उनका इतिहास में नाम है और जब-जब इतिहास में सम्राटों का नाम आएगा तब तक सम्राट अशोक का नाम जरूर आएगा.

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